नागरिकता का अर्थ एवं अवधारणा

नागरिक शब्द लैटिन शब्द सिविस (CIVIS) तथा इसके समानार्थी शब्द 

पॉलिटिस (POLITIES) से निकला जिसका मतलब है (POLIS) शहर का सदस्य 

नागरिकता एक व्यक्ति और राज्य के बीच का संबंध है 

इसे अधिकारों और कर्तव्यों के संदर्भ में देखा जाता है 

टी एच मार्शल के अनुसार “नागरिकता एक राजनीतिक समुदाय में पूर्ण 

और समान सदस्यता है”

नागरिकता के 3 आयाम है

सिविल आयाम - इसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता, भाषण, विचार एवं 

विश्वास की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत संपत्ति पर अधिकार की स्वतंत्रता 

एवं न्याय संगत व्यवस्था हेतु संघर्ष करने का अधिकार शामिल है 

न्यायालय प्रमुख रूप से सिविल अधिकारों से जुड़े हुए हैं


राजनीतिक आयाम

इसमें राजनीतिक सत्ता के कार्यों में भाग लेने का 

अधिकार शामिल है जैसे मतदान का अधिकार, राजनीतिक विशेषअधिकार 

राजनीतिक नेतृत्व की अपेक्षा एवं समर्थन, न्याय और समानता के पक्षधरों का 

समर्थन तथा अनुचित राजनीतिक व्यक्ति के विरुद्ध संघर्ष


सामाजिक आयाम

इसमें आर्थिक कल्याण एवं सुरक्षा, सामाजिक विरासत में 

भाग लेना तथा समाज विशेष में प्रचलित मानकों के आधार पर जीवन जीने 

का अधिकार आता है


उदारवादी सिद्धांत

उदारवादी सिद्धांत स्वतंत्र नागरिक बनाने की आशा करता है जिसमें विभिन्न 

सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा लोक शिक्षा इसमें सहायता करें

नागरिक किसी भी वर्ग या धार्मिक समुदाय के सदस्य हैं उन्हें उदारवादी लोकतांत्रिक 

समाज की शिक्षा स्वतंत्र एवं समान व्यक्ति के रूप से मिले  

नगर संस्कृति से उदारवादी लोकतंत्र फला फूला, इसने जीवन जीने के तरीके, प्रकृति के 

अनुभवों,नैतिक मानकों व उपयुक्त मानदंडों को प्रस्तुत किया 

नगर संस्कृति में मजबूत किलेबंदी की क्षमता होती है


नागरिकता का मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य

मार्क्सवादी मानते हैं कि वर्ग संबंध  मूल सामाजिक संबंध है 

उनके अनुसार पूंजीवादी राज्य का सिद्धांत सामाजिक संबंधों को नागरिकों 

के बीच वर्ग संबंधों के रूप में व्यक्त करता है अर्थात समाज 2 वर्गों में वर्गीकृत है 

1) पूंजीपति 

2) श्रमिक वर्ग

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शक्तिशाली वर्गों के प्रभुत्व के कारण 

अपने नागरिक अधिकारों का प्रयोग करने की स्थिति में नहीं है 

नागरिकों की स्वतंत्रता एवं समानता बाजार के आदान-प्रदान संबंधी 

कार्यों में अपना अलग-अलग स्थान रखती हैं 

उदाहरण के लिए किसान और जमीदार या कर्मचारी और व्यापारी


बहुलतावादी सिद्धांत

इसके अनुसार नागरिकता का अर्थ व्यक्ति और समुदाय के बीच 

पारस्परिक संबंध है डेविड हेल्ड कहते है “व्यक्ति समुदाय के खिलाफ कुछ अधिकारों का हकदार है तथा वह 

समुदाय के प्रति कुछ कर्तव्य का भी पालन करता है” 

बहुलवादी सिद्धांत लिंग, जाति, धर्म, संपत्ति, शिक्षा, व्यवसाय या उम्र के 

आधार पर लोगों के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव की समीक्षा पर जोर देता है


नारीवादी परिप्रेक्ष्य

नारीवादियों का तर्क है कि राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक 

क्षेत्रों में पुरुषों के वर्चस्व के कारण महिलाएं दूसरी श्रेणी की नागरिक हैं 

किसी भी देश में राजनीतिक भागीदारी एवं प्रतिनिधित्व पुरुषों की तुलना में नारी का कम है

इसीलिए पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता लाने के लिए 

उदारवादियों का मानना है कि संवैधानिक सुधार होना चाहिए 

जिससे पुरुष घरेलू कार्यों में योगदान करेंगे 

इसे नागरिक नारीवाद कहा जाता है 

कट्टरपंथी नारीवादी चाहते हैं कि उन्हें सक्रिय नागरिक बनाने के 

लिए महिलाओं का सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश हो


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